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गुरु सायुज्य तंत्र सिद्धि मालाः निर्माण विधान

महाकाल तंत्र सिद्धि माला

काली हकीक माला
काली हकीक माला

महाशांति विधान की साधना और गुरु सायुज्य तंत्र कर्म सिद्धि मंडल से संबंधित सभी प्रयोग विधि विधान सहित वेबसाइट पर प्रकाशित हो चुके हैं । मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप ने इनसे संबंधित जरूरी साधना क्रम अब तक संपन्न कर लिये होंगे ।


अब इस श्रृंखला का आखिरी लेख जो गुरु सायुज्य तंत्र सिद्धि माला के निर्माण से संबंधित है, आज यहां आप सभी के लिए उपलब्ध हो रहा है । इस माला को महाकाल तंत्र सिद्धि माला भी कहते हैं या सीधे शब्दों में तंत्र सिद्धि माला भी कहा जा सकता है ।


108 मनकों की इस माला पर गुरु तत्व और भैरव तत्व के विभिन्न रूपों की स्थापना की जाती है और उसके बाद सुमेरू में त्रयी शक्ति का आवाहन किया जाता है, जिसके कारण यह माला अपने आप में विलक्षण क्षमता से युक्त हो जाती है और शांति कर्म की साधनाओं में पूर्ण सफलता प्रदान करती है ।

इस माला का प्रयोग तंत्र की अन्य विधाओं जैसे आकर्षण और सम्मोहन इत्यादि में भी किया जा सकता है ।


इस माला के नित्य प्रयोग से होने वाले लाभ अनगिनत हैं लेकिन संदर्भ के लिए यहां कुछ लाभ लिख रहा हूं -

  1. जीवन में सम्मोहन तत्व की स्वतः प्राप्ति होना

  2. जीवन की नकारात्मक शक्तियों का इस माला के प्रभाव से सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तन

  3. सौंदर्य में वृद्धि

  4. आयु के प्रभाव में कमी

  5. जीवन में शांति प्राप्त होना


इसके लिए आप काले हकीक या रुद्राक्ष की प्राण प्रतिष्ठित माला का प्रयोग करें ।


मजबूत माला का प्रयोग करें । माला अगर मजूबत न मिल रही हो तो स्यवं ही इस माला को बना लें । बाजार से काली हकीक माला खरीद लायें । उसके दाने निकालकर, किसी मजबूत धागे में, मनके पिरोते रहें । प्रत्येक मनके को पिरोते समय गुरु मंत्र का उच्चारण करते रहें । प्रत्येक मनके के बाद एक गांठ लगा लिया करें और प्रत्येक गांठ पर भी गुरु मंत्र का जप चलता रहेगा ।


कुल 108 मनके और एक सुमेरू होना चाहिए । सुमेरू पर सुंदर का धागे का गुच्छा बांध लें ताकि सुमेरू सुंदर बन सके । बाद में माला को गंगाजल से स्नान कराकर, निम्न मंत्र का 108 बार जप कर लेने से माला प्राण प्रतिष्ठित हो जाएगी । मंत्र जप के समय माला उंगलियों में घूमती रहेगी -


।। माले माले महामाले सर्व तत्व स्वरुपिणी । चतुर्वर्गस्त्वयि न्यस्त स्तस्मंमे सिद्धिदा भव ।। 

(Male Male Mahaamale Sarv Tatva Swarupini, chaturvargastwayi Nyasta Stasmame Sidhhida Bhav)


माला में प्राण प्रतिष्ठा से संबंधित लेख आपको यहां मिल जाएगा


महाकाल तंत्र सिद्धि मालाः निर्माण विधान


दिनः रविवार


समयः रात्रि 9 बजे के बाद


वस्त्रः काले


सामने बाजोट या चौकी पर पीला वस्त्र बिछा लें और उस पर एक तांबे का पात्र स्थापित कर लें । सिद्ध करने के लिए अपनी काली हकीक या रुद्राक्ष माला को गंगाजल से स्नान कराकर तांबे के पात्र में स्थापित कर लें ।


सामने सिंदूर और काजल के लेप से भरा हुआ लोहपात्र स्थापित कर लें ।


इसके बाद सदगुरुदेव और माँ आद्याशक्ति कामाख्याकाली से इस माला का संस्कार कर दिव्यत्व प्रदान करने की प्रार्थना करें । इसके बाद दैनिक पूजन (गणपति पूजन, गुरु पूजन और गुरु मंत्र की 5 माला) संपन्न कर लें ।


दैनिक पूजन संपन्न करने के बाद निम्न मंत्र का उच्चारण करें और 1 बिंदी माला के पहले मनके पर लगायें । ये क्रम 108 मनकों तक करना है -

।। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ ।।


जब 108 मनके पूरे हो जायें तब इसी माला से 11 माला निम्न मंत्र की संपन्न करें -


।। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौः हंसः शिवः स हं हंसः स्वरुप निरूपण हेतवे श्री गुरुवे नमः ।।


जब 11 माला मंत्र जप संपन्न हो जाए तब गुरु प्राणश्चेतना मंत्र का 11 बार उच्चारण कर पुष्प से स्पर्श करते हुए इस माला को विशिष्ट चेतना प्रदान करे । गुरु प्राणश्चेतना मंत्र वेबसाइट पर पहले से ही उपलब्ध है, मैं यहां उसकी लिंक उपलब्ध करा रहा हूं


गुरु तत्व और भैरव तत्व स्थापना के ये मंत्र और इससे जुड़ी क्रिया अपने आप में गोपनीय रही है। इस क्रिया को करते समय मात्र एक बात का ध्यान रखना है कि जब आप शक्ति का स्थापन कर रहे हों तब आपको मंत्र उच्चारण करते समय बांया हाथ अपने हृदय पर रखकर हृदय मुद्रा का प्रदर्शन करते जाना है और, माला को मंत्र बोलते हुये घुमाते जाना है । जब निम्नलिखित मंत्रों का उच्चारण हो जाए, तो उन्हे सामने रख कर उनके सामने योनिमुद्रा का प्रदर्शन करें -


हृदय मुद्रा
हृदय मुद्रा
योनि मुद्रा
योनि मुद्रा














गुरु तत्व और भैरव तत्व स्थापन


ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ क्रोध भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ शमशान भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ कापाली भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ काल भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ कालान्तक भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ रुरु भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ महाघोर भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ घोरतर भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ संहार भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ चंड भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ हुंकार भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ अनादि भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ उन्मत्त भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ आनंद भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ भूताधिप भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ कृतान्त भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ असितांग भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ कालाग्नि भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ उग्रायुध भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ वज्रांग भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ कराल भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ विकराल भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ महाकाल भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ कल्पांत भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ विश्वान्तक भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ प्रचण्ड भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ भगमाली भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ उग्र भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ भूतनाथ भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ भद्र भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ संपतप्रद भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ मृत्यु भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ यम भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ अन्तक भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ उल्कामुख भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ एकपाद भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ प्रेत भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ मुंडमाली भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ बटुक भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ क्षेत्रपाल भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ दिगंबर भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ वज्रमुष्टि भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ घोरनाद भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ चंडोग्र भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ सन्तापन भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ क्षोभण भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ ज्वालासंवर्त्त भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ वीरभद्र भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ त्रिकालाग्नी भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ शोषण भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ त्रिपुरान्तक भैरवाय नमः ।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ अष्ट भैरवाय नमः ।


सुमेरु शक्ति स्थापन


माला में गुरु तत्व एवं भैरव शक्ति के स्थापन के बाद, माला के सुमेरु के ऊपर रक्त चंदन की बिंदी लगाते हुये निम्न मंत्र का 108 बार उच्चारण करना है ।


एक बार मंत्र उच्चारण होगा और एक बिंदी लगानी है । इसी प्रकार 108 बार उच्चारण करना चाहिए ।


जब 108 बिंदी लग जाएं तब माला का पूर्ण पंचोपचार पूजन करना है, और उसी माला से निम्न मंत्र की 1 माला मंत्र जप करना है और माला को वापिस पात्र में रखकर योनिमुद्रा का प्रदर्शन करना है -


सुमेरू आकर्षण विद्या सायुज्यीकरण


।। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ॐ ॐ श्रीं ह्रीं ऐं ॐ ।

Om Aim Hreem Shreem Om Om Shreem Hreem Aim Om


इस प्रकार आपकी साधना की सबसे महत्वपूर्ण सामग्री गुरु सायुज्य तंत्र सिद्धि माला का निर्माण पूरा होता है । इस माला का आप महाशांति साधना विधान से सबंधित प्रयोगों में प्रयोग करें और स्वयं देखें कि जीवन में किस प्रकार से सहज ही सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और जीवन में अनुकूलता आती ही है ।


आप सब अपने जीवन के इस सबसे महत्वपूर्ण साधना क्रम को सफलता पूर्वक संपन्न कर सकें, जीवन में परम शांति प्राप्त कर सकें, और इन सबसे बढ़कर गुरु की कृपा के पात्र बन सकें, ऐसी ही शुभेच्छा है ।


अस्तु ।


 

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